You can not go back and make a new beginning, but you can start today and make a new ending!
Monday, September 8, 2025
बातूनी!
Monday, June 16, 2025
हम क्या चाहते हैं ?
Belvedere Museum, Vienna
मेरे बालों में उंगली फिराने के बहाने
अचानक ज़रा सा खींच दो,मजाक में ।
मै ये चाहता हूं!
तुम बालों में ब्रश करो सोने से पहले
और मैं रोज़ एकटक ,मंत्रमुध देखूं ।
मै ये चाहता हूं!
"काफी कड़वी लगती है? यू आर ए किड"।
कह के खूब कहकहे लगाओ मुझ पर ।
मै ये चाहता हूं!
तुम कालेज के बारे में सवाल पूछो,
जो अभी हुए ही नहीं उन बच्चों के।
मै ये चाहता हूं!
तुमको नहीं आता बोल चाइनीज तुम ऑर्डर करो।
घर पर किसी दिन दोनों के लिए मैगी से काम चलाओ।
मै ये चाहता हूं!
भीगी भीगी आंखों से अपने राज़ मुझे बताओ।
मेरे थोडे शरारती जोक पर आँखें भींच हंसो।
मै ये चाहता हूं!
हम फिल्म देखने जाएं और टिकट ही न मिले।
मेरा कुछ सामान तुम्हारी कपड़ों की अलमारी में मिले ।
मै ये चाहता हूं!
सुस्त ट्रेन की ऊपरी बर्थ पर बतियाएं हम।
तिब्बती मार्केट से मेरा स्वेटर खरीदो तुम।
मै ये चाहता हूं!
लालची हूं इसलिए सारी दुनिय़ा के बदले ,
मुनाफे का सौदा - तुम्हे मांगता हूं!
मै ये चाहता हूं!
तुम फिर भी चाहती हो आज़ादी!
हां, मुझसे चाहिए ! हां, अभी चाहिए !
रहने दो ,आज से मै कुछ नही चाहता !
Sunday, June 8, 2025
वादा, मेरा वादा!
नए नाम के नए रंग में बरसों बाद तुझे देखकर,
रूह तक के दुखते ज़ख्म बेदर्दी से खुरचे गए फिर।
डूबते दिल को भरोसा दिया इस सच ने सामने आकर,
अब भी वैसी की वैसी है तेरी, हिकारत भरी वो नजर।
जीवन भर के साथ का उधार बकाया है तुझपर,
तकाज़ा करने आया कभी कोई क्या तुम्हारे दर?
कर्ज वापिस हो कैसे,क्यों, क्या करोगी सोचकर,
तुम जियो जिंदगी गुलाबी, मखमली; बेफिक्र होकर।
मै हूँ,रख लूंगा सारी तल्खियां अपनी नाकामी में सहेज कर,
बता क्या करूं, ये वादा कर जो दिया था तुझपे ऐतबार कर!
तुम अपनी चुप से कहती चलो, 'मरदूद चुप कर',
ढीठ हूँ, हवाओं से तेरी लेता रहूंगा खोज खबर।
इस मूर्ख को समझाया था डूबता सौदा मत कर,
चलो दो, अगली बार के लिए कोरा कागज़ दस्तख़त कर।
एवज में समय के अंत तक मांगूंगा ,'प्रभु इसका भला कर',
या कि फिर वादा खिलाफी करोगी, अख्तियारों का पत्ता चल कर?
अपनी भली खबर भेजो, दो अक्षर हाल लिख डालो। ...बस मुक्तसर
मेरी वफ़ा है बस अक्स तेरा; इसी हिकमत से फिर तेरे साथ रहूंगा उम्र भर,
बता क्या करूं? ये वादा कर जो दिया था तुझ पर ऐतबार कर!
Saturday, May 31, 2025
उससे कहना! USSAY KEHNA!
"An old man talking" Etching by Salvatore Rosa
उससे कहना!
घर के उसका मुझको पता है,
हर इक रास्ता नप रखा है।
उस दुनिया से चल भी बसा हूं।
जाने क्या मै सोच रहा हूं।
मिले तो उससे लाज़िम कहना;
मै बस उसको ढूंढ रहा हूं।
सख्त लफ्ज़ से दूर रहूंगा;
अपना हक पर लेके टलूंगा।
"खुश तो हो तुम"?,
ये सवाल पूछने सदियों से ,
मैं बस उसको ढूंढ रहा हूं।
मिले तो उससे लाज़िम कहना।
मेरी दुनिया तुम में थी बस;
वो ही दुनिया लूट लुटाकर,
कब्र पे मेरी ताज बनाकर।
सौदा सस्ता पड़ा कि महंगा?
और फ़ज़ूल की बात बनाने
मैं बस उसको ढूंढ रहा हूं।
मिले तो उससे लाज़िम कहना।
गली मुहल्ले, चौक के रस्ते,
हर दिन, हर पल जगते सोते;
हर इंसा में, हर पत्थर में;
हर कांटे को हाथ चुभा कर;
मै बस उसको ढूंढ रहा हूं।
मिले तो उससे लाज़िम कहना।
आदमी शरीफ़ है तो पुल से कूदे!
कन्या राशि का कमबख्त है;
कुछ पल रोया, निकल लिया फिर सब्जी लेने।
बाकी का आके रो लेगा!
बहुत प्रैक्टिकल है अपना भाई;
अच्छा किया जो जान छुड़ाई।
इस सब से सहमत होने को
मैं बस उसको ढूंढ रहा हूं।
मिले तो उससे लाज़िम कहना।
गम को लफ्जों में ढालो तो
जाम ए जहर इक बन जाएगा।
किसी शाम फिर बैठें सामने,
पीने पिलाने, इसी बहाने,
मैं बस उसको ढूंढ रहा हूं।
मिले तो उस से लाज़िम कहना।
पुनर्जन्म गप्प नही है सारी;
बस पे चढ़ने न दूंगा इस बारी!
जनम लगें जितने लगने दो;
थाली भर के, ठूंस के लूंगा!
हां दो ही निवाले नहीं चलेंगे!
ऐसा ज़रा सा धमकाने को,
मैं बस उसको ढूंढ रहा हूं।
मिले तो उससे लाज़िम कहना।
बिसात है क्या दुश्मन की जो दे
सच्चे दोस्त के बक्से में ही,
बस पहली दूजी ही तह में;
दगा पड़ा रखा मिलेगा!
भूली कसमें होंगी, टूटा वादा दिखेगा ।
इत्ता ज़रा छिपाना कि
अपने फायदे का फलसफा सिखाने,
मै बस उसको ढूंढ रहा हूं।
मिले तो उससे लाज़िम कहना।
आखिरी शब को, आखिरी लम्हे;
कान लगा के गौर से सुनना।
जाते जाते यही कहूंगा;
मै बस उसको ढूंढ रहा हूँ!
उससे कहना!
उससे कहना!
Friday, May 30, 2025
लाल फूल के पीछे! Lal phool ke peeche!
'Poppies' by Vincent Van Gogh



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