Saturday, October 6, 2018

  यूं ही बस ! Yoon Hi Bus !

Painting by Rob Gonsalves
शक्ल वो किसी सूरत अब याद आती ही नही।
लाख कोशिश भी की पर याद जाती ही नही।

तुम यूं ही बस  घबराते हो ,छिपते हो ; दिखते ही नही।
इत्तफ़ाकन टकरा गए तो भी क्या पहचानेगे ? नही !

पहले ही क्या पहचाना ? समझते  सुनते  थे , माना ही नही !
बड़ी गाड़ी में कौन बैठा है ; सवारी बस से दिखता ही  नही।

एहतियातन अपना  मुँह फेर लेना ; यूं ही बस !
चेहरे की रंगत तुम्हारी चुगली न कर  बैठे ; बस !

ये अच्छा रहेगा। अजनबियत  का नाटक करना  न पड़ेगा।
मन भर चुका  है  मंच से ; आँखों से सच टपक पड़ेगा।

यूं ही बस तुम्हारे पास होने का अहसास होता है।
खुदा भी तो नज़र आता नहीं ; यूं ही बस होता है।

तुम तो खुदा नही ,आ सकती थी  सामने। आती तो क्या होता ?
तुम जुदा हो। सलाम न करती; तस्लीम  करती तो क्या होता ?

क्यों करती ? था क्या ? ख़ामख़्वाह ; जबरदस्ती ; बस यूं ही ?
कभी मिलो। कुछ कहना सुनना न पड़ेगा। यूं ही , बस यूं ही!


Roman script follows:-

Shql vo kisi surat ab yaad aati hi nahi. 
lakh koshish bhi ki pr  yaad jati hi nahi. 

Tum yoon hi bus gabrate ho,chipte ho; Dikhte hi nahi.
Itifaqan takra gaye to bhi kya pehchanege? Nahi !

Pehle hi kya pehchana ? samajhte sunte the , mana hi nahi !
badi gadi may kaun baitha hai ; sawari bus se dikhta hi nahi.

Ahtiyatan apana muh fer lena ; Yoon hi bus !
Chehre ki rangat tumahari chugli na kar baithe; bus !

Ye accha rahega. Ajnabiyat ka natak karna na padega. 
Man bhar chukka hai manch se ; ankhon se sach tapak padega. 

Yoon hi Bus tumhare paas hone ka ahsas hota hai. 
Khuda bhi to nazar aata nahi ; yoon hi bus hota hai.

Tum to Khuda nahi,aa sakti thi saamne. Aati to kya hota ?
Tum juda ho. Salaam na karti; tasleem karti to kya hota ?

Kyon karti ? Tha kya ? Khamakhwah ; Jabardasti ; bus yoon hi ?
Kabhi milo. Kuch kehna sunana na padega. Yoon hi, Bus yoon hi! 











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